आर्थिक स्थिति कैसे सुधारें?

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पहले इन्सान पैसा न होने से डरता है बाद में पैसा खो जाने के डर से जीता है। दोनो ही स्थितियो में पैसा उसको चलाता है यानी पैसा आजाने से उसकी ज़िन्दगी में सुधार नही होता, बस डर और इच्छाओं का विकास हो जाता है।

एक बार एक परिंदा एक डाल पर आकर बैठा। डाल ऊंचा था और फल भी था। सुरक्षा भी थी। वह थोड़ा सुस्ताने लगा फिर एक हवा का झोंका आया उसके बाद तेज़ हवा चलने लगी। हवा इतनी तेज हो गयी कि डाल टूट गया।

परिंदा आगे बढ़ा और दूर कही बैठ गया। वो घबराया तक नही क्योकि वह दीन दुनिया की 2 सच्चाई जानता था, पहली यह कि बिना डाल के भी वह अपने पंखों की मदद से उड़ और खुद को safe रख सकता है, दूसरा उसे पता था कि इस दुनिया मे डाल और मिलेगी।

यह कहानी हमे हमारे आत्मविश्वास और हिम्मत सिखाती है। यह सिखाती है कि आपकी नौकरी या आपका व्यवसाय कभी भी भेंट चढ़ स्खता है। कॉलेज जाकर पढ़ने वाले और और नौकरी हासिल करने वाले लोग सिर्फ वह ही बनकर रह जाते है जिनकी उन्होंने ट्रेनिंग ली होती है। किसी ने वकालत की, किसी ने chef की ट्रेनिंग ली तो वह केवल वकील या शेफ बनकर ही रह जाते है। यह एक बड़ी समस्या है। अक्सर लोग नौकरी में जाते ही, नौकरी न मिल पाते ही हताश निराश है।

यह परिंदा हमे सिखाता है कि इस दुनिया मे हमारी नौकरी या हमारा काम ही वह आखरी नही है। डाली बहुत है, पेड़ बहुत है, पंख तो अपने पास है।

धनवान लोग पैसे नहीं बचाते।  वे सभी बुद्धिमानी से निवेश (invest) करते हैं और अपने पैसे को उनके लिए काम करने देते हैं और साथ साथ वह दूसरी इनकम स्ट्रीम के बारे में लगातार सोचते है, दूसरी स्ट्रीम से पैसा कमाना, पैसा बचाने के मुकाबले में आसान है और अधिकतर लोग आसान रास्ता ही चुनते है. अपने खर्चों में कटौती करने की तुलना में अपनी आय बढ़ाना अधिक महत्वपूर्ण है। जैसे शाम को अपने किसी दोस्त की दुकान पर जाकर दिन का हिसाब करना, टूरिस्ट सिटी में हो तो गाइड का काम करना, उनको सस्ती डील दिलवाना, लेख लिखना, ब्लॉग या व्लोग करना। खुद पर निवेश करके सेल्स ,कॉपीराइट, मार्केट, एप्प डिवेलपमेंट, लोगो डिवेलपमेंट जैसे स्किल सीख कर बेचना.   यदि आप बदलने के लिए तैयार हैं और काम करने के लिए तैयार हैं, तो पैसे कमाने के नए अवसर आपके काम आएंगे.

महत्वपूर्ण है यह समझना कि पैसा काम कैसे करता है। फ्री में नौकरी करना और सीखना, सैलरी लेकर कम्फर्ट जोन में लेटने से बेहतर है। आप मात्र 5 साल सिर्फ 5 सफल लोगो के साथ बैठने से ही अमीर हो सकते हो।  अमीर और सफल लोग अपना सारा काम खुद नही करते, उनके पास काम और मौके की कमी नही है, वह ऑटोमेट करते है काम को डेलीगेट करते है.

पहले इन्सान गरीब होने के डर से नौकरी करता है फिर वह 1 से 2 साल में कमाने लगता है तो उसकी इच्छाओं का विकास होता है। पहले वह इससे परेशान था कि ऐसा न हो कि उसे रोटी न मिले, अब वह इससे परेशान है कि ऐसा न हो कि सब्जी मिल जाये। पहले उसके पास साधन न होना एक समस्या थी, अब साधन की इच्छा होना एक समस्या बन गयी है। पहले वह डर के कारण नौकरी करता था, सेफ चलता था अब वह इच्छाओं के किये नौकरी करता है और सेफ चलता है। पहले वह पैसा न होने से डरता है बाद में पैसा खो जाने के डर से जीता है। दोनो ही स्थितियो में पैसा उसको चलाता है यानी पैसा आजाने से उसकी ज़िन्दगी में सुधार नही होता, बस डर और इच्छाओं का विकास हो जाता है। इसी को चूहा दौड़ कहते है।

इंसान झटकों से डरता है, गरीब होने से डरता है और पैसे की इस दीर्घकालीन समस्या से लड़ने के लिए उसको अल्पकालीन समाधान नौकरी ही दिखता है। वह रोज़ सुबह उठता है काम पर जाता है सरकार को टैक्स देता है, विभागों का पेट भरता है, अपने मालिक के लिए काम करता है, मालिक के बच्चो को अमीर बनाता है, सब पर चिल्लाता है कि उसके साथ गलत हो रहा है ,फिर वह सो जाता है और अगले दिन वापस काम पर जाता है, सेफ चलता है, इधर उधर के मौकों को देख आंख मूँदता है, परंपराओं को ढोता है और एक दिन बुड्ढा बनकर मर जाता है। 




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